सबरी सुबी की किताब 'Sell Like Crazy 

बिजनेस की दुनिया में सबसे बडा सच यह है कि मेहनत और नतीजे के बीच का फर्क समझना ही एक सफल उद्यमी की पहचान है। ज्यादातर लोग दिन भर खुद को बहुत व्यस्त रखते हैं, लेकिन महीने के अंत में उनका मुनाफा उनकी मेहनत के मुकाबले बहुत कम होता है। सबरी सुबी की यह किताब सिखाती है कि आपको एक 'ऑपरेटर' की मानसिकता छोडकर एक 'बिजनेस ओनर' बनना होगा। इसका मतलब है उन 80 प्रतिशत मामूली कामों को छोड देना जो केवल 20 प्रतिशत नतीजे देते हैं, और अपना पूरा ध्यान उन 20 प्रतिशत गतिविधियों पर लगाना जो 80 प्रतिशत रेवेन्यू पैदा करती हैं। इसे और भी गहराई से देखें तो आपके बिजनेस के केवल 4 प्रतिशत काम ही आपके 64 प्रतिशत मुनाफे के लिए जिम्मेदार होते हैं। आपको अपने समय की एक 'डॉलर वैल्यू' तय करनी होगी और हर वह काम जो कोई और कम पैसों में कर सकता है, उसे दूसरों को सौंप देना चाहिए। आपका असली काम सेल्स और मार्केटिंग की मशीन को डिजाइन करना है, न कि उसके अंदर एक पुर्जे की तरह काम करना।

फेज 1 में हम 'ड्रीम बाय' यानी अपने आदर्श ग्राहक को पहचानने की गहराई में उतरते हैं। यहाँ 'लार्जर मार्केट फार्मूला' समझना जरूरी है, जो बताता है कि किसी भी समय केवल 3 प्रतिशत लोग ही तुरंत खरीदने के लिए तैयार होते हैं। आपके सभी प्रतियोगी इसी छोटे से हिस्से के लिए लड रहे हैं, जिससे वहां विज्ञापनों की कीमत बहुत ज्यादा है। असली दौलत उन बाकी 97 प्रतिशत लोगों में है जो या तो जानकारी जुटा रहे हैं या अपनी समस्या से परेशान हैं लेकिन समाधान नहीं जानते। आपको 'हेलो स्ट्रेटजी' का इस्तेमाल करके अपने ग्राहक के उन डरों और सपनों को समझना होगा जो वे किसी को नहीं बताते। जब आप उनके दिमाग में चल रही बातचीत को पकड लेते हैं, तो आपकी मार्केटिंग एक जादुई असर पैदा करती है। आपको रेडिट, कोरा और अमेज़न रिव्यूज जैसे प्लेटफॉर्म्स पर जाकर एक जासूस की तरह यह देखना चाहिए कि आपका ग्राहक किस बात से दुखी है। जब आप उनकी समस्या को उनसे भी बेहतर शब्दों में बयां कर देते हैं, तो वे मान लेते हैं कि आपके पास उसका सबसे अच्छा समाधान भी होगा।

फेज 2 में हम उस 'परफेक्ट बेट' यानी चारे को तैयार करते हैं जिसे 'हाई-वैल्यू कंटेंट ऑफर' (HVCO) कहा जाता है। सीधे अपना प्रोडक्ट बेचने की कोशिश करना एक अजनबी से सडक पर शादी का प्रस्ताव मांगने जैसा है। इसके बजाय, आपको उन्हें कुछ ऐसा कीमती मुफ्त उपहार देना होगा जो उनकी किसी एक बडी समस्या का तुरंत समाधान कर दे। यह एक फ्री रिपोर्ट, चीट शीट या वीडियो हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आप रियल एस्टेट में हैं, तो "फ्लैट खरीदें" कहने के बजाय "प्रॉपर्टी खरीदते समय होने वाली 5 धोखाधडी से कैसे बचें" वाली गाइड दें। यहाँ आपका लक्ष्य बेचना नहीं, बल्कि शिक्षित करना है। जब आप ग्राहक को मुफ्त में इतनी वैल्यू देते हैं कि वह हैरान रह जाए, तो आप मार्केट में एक सामान्य सेल्समैन से ऊपर उठकर एक 'मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ' बन जाते हैं। यह विश्वास ही वह नींव है जिस पर आगे चलकर बडी सेल्स खडी होती है।

फेज 3 में हम उन लीड्स को पकडने और उनका डेटा इकट्ठा करने का सिस्टम बनाते हैं। इसके लिए एक बहुत ही सरल 'लैंडिंग पेज' की जरूरत होती है जहाँ कोई भटकाव न हो। इस पेज पर एक दमदार हेडलाइन होनी चाहिए जो सीधे ग्राहक के फायदे की बात करे। इसमें केवल उनका नाम और ईमेल मांगने का एक छोटा फॉर्म होना चाहिए। यहाँ 'कॉल टू एक्शन' बिल्कुल साफ होना चाहिए, जैसे "मुझे मेरा फ्री रोडमैप भेजें।" आपको यह समझना होगा कि हर वह व्यक्ति जो आपका फ्री कंटेंट डाउनलोड कर रहा है, वह आपका एक संभावित ग्राहक है। यह डेटा आपके बिजनेस की सबसे बडी संपत्ति है। आज के समय में फेसबुक और गूगल एड्स के जरिए आप इस लैंडिंग पेज पर हजारों लोगों को भेज सकते हैं। रोडमैप यह है कि आपका लैंडिंग पेज जितना सरल होगा, उतने ही ज्यादा लोग उसे भरेंगे और आपकी ईमेल लिस्ट उतनी ही तेजी से बढेगी।

फेज 4 में हम 'द गॉडफादर ऑफर' तैयार करते हैं, जो आपके पूरे बिजनेस का दिल है। यह एक ऐसा प्रस्ताव है जिसे ठुकराना ग्राहक के लिए घाटे का सौदा लगे। एक साधारण प्रोडक्ट को एक बेजोड ऑफर में बदलने के लिए आपको उसमें 'रिस्क रिवर्सल' जोडना होगा। ग्राहक के मन में हमेशा डर होता है कि कहीं उसके पैसे न डूब जाएं। आपको एक ऐसी 'अल्ट्रा-पावरफुल गारंटी' देनी होगी जो उस डर को खत्म कर दे। जैसे डोमिनोज ने कहा था, "30 मिनट में पिज्जा, नहीं तो फ्री।" आपको भी अपने ऑफर में कुछ ऐसा जोडना होगा जो आपके आत्मविश्वास को दिखाए। इसमें बोनस चीजें शामिल करें जिनकी वैल्यू बहुत ज्यादा हो लेकिन आपकी लागत कम हो। साथ ही, 'कमी' (Scarcity) और 'तात्कालिकता' (Urgency) का इस्तेमाल करें ताकि ग्राहक अभी फैसला लेने के लिए मजबूर हो जाए। जब रिस्क शून्य होता है और फायदा बहुत बडा दिखता है, तो सेल्स अपने आप होने लगती है।

फेज 5 में हम ट्रैफिक जनरेशन और विज्ञापन की कला को समझते हैं। यहाँ विज्ञापन को एक खर्च के बजाय निवेश की तरह देखा जाता है। आपको अपनी 'यूनिट इकोनॉमिक्स' का पता होना चाहिए, यानी एक ग्राहक लाने की कीमत और उससे होने वाला कुल मुनाफा। गूगल और फेसबुक दो अलग-अलग हथियार हैं। गूगल उन लोगों के लिए है जो समाधान ढूंढ रहे हैं, जबकि फेसबुक उन लोगों को रोकने के लिए है जो मनोरंजन कर रहे हैं। आपको 'री-टारगेटिंग' का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, क्योंकि ज्यादातर लोग पहली बार में नहीं खरीदते। जब वे आपको बार-बार अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर देखते हैं, तो उन्हें आपके ब्रांड की ताकत का अहसास होता है। रोडमैप यह है कि शुरू में छोटे बजट से टेस्टिंग करें और जब कोई विज्ञापन काम करने लगे, तो उस पर पूरी ताकत झोंक दें। जो ग्राहक को हासिल करने के लिए सबसे ज्यादा पैसा खर्च कर सकता है, वही मार्केट का असली राजा बनता है।

फेज 6 में 'मैजिक लालटेन तकनीक' का जादू शुरू होता है। यह एक ऐसी रणनीति है जो आपकी लीड्स को धीरे-धीरे गरम करती है और उन्हें खरीदारी के लिए तैयार करती है। इसमें आप 2 से 3 ऐसे वीडियो या ईमेल भेजते हैं जो ग्राहक को एक-एक कदम आगे बढाते हैं। हर वीडियो उन्हें एक 'क्विक विन' यानी छोटी जीत दिलाता है। आप उन्हें सिखाते हैं कि वे अपनी समस्या को कैसे हल करें। जब ग्राहक को आपके मुफ्त कंटेंट से रिजल्ट मिलने लगते हैं, तो उसका भरोसा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। वह सोचने लगता है कि अगर आपका मुफ्त ज्ञान इतना असरदार है, तो आपकी पेड सर्विस कितनी शानदार होगी। यह तकनीक 'परस्परता' के सिद्धांत पर काम करती है, जहाँ ग्राहक आपके उपकारों के बदले आपसे जुडना चाहता है। यह वह पुल है जो एक ठंडी लीड को एक वफादार ग्राहक में बदल देता है।

फेज 7 में हम सेल्स क्लोज करने के असली तरीके को मास्टर करते हैं। यहाँ आपको एक सेल्समैन नहीं, बल्कि एक डॉक्टर की तरह व्यवहार करना है। डॉक्टर कभी सामान नहीं बेचता, वह बीमारी का 'निदान' करता है। आपको ग्राहक से सही सवाल पूछने चाहिए ताकि वह खुद अपनी समस्या और उसके डर को बयां कर सके। सेल्स कॉल पर आपका काम 80 प्रतिशत सुनना और सिर्फ 20 प्रतिशत बोलना होना चाहिए। 'प्री-क्वालिफाइंग' सर्वे का इस्तेमाल करें ताकि आप अपना समय सिर्फ उन लोगों पर खर्च करें जो वाकई खरीदने के काबिल हैं। जब आप ग्राहक की समस्या को उससे भी बेहतर तरीके से समझा देते हैं, तो समाधान बेचना बहुत आसान हो जाता है। सेल्स क्लोज करते समय आत्मविश्वास के साथ अपनी कीमत बताएं और फिर चुप हो जाएं। जो पहले बोलेगा, वह हार जाएगा। यह मनोवैज्ञानिक खेल ही बडी डील्स क्लोज करने की चाबी है।

अंतिम फेज 8 में हम ऑटोमेशन और स्केलिंग की बात करते हैं। जब आपका सेल्स सिस्टम काम करने लगे, तो अब उसे एक मशीन की तरह चलाने का समय है। आपको हर काम के लिए एसओपी (SOP) बनाने होंगे ताकि आपके बिना भी काम की क्वालिटी खराब न हो। अपनी टीम में 'ए-प्लेयर्स' को रखें जिन्हें काम समझाना न पडे, बल्कि वे आपको रिजल्ट लाकर दें। तकनीक और सॉफ्टवेयर जैसे जैपियर और सीआरएम का इस्तेमाल करें ताकि लीड्स का फॉलो-अप अपने आप होता रहे। स्केलिंग का मतलब सिर्फ ज्यादा पैसा खर्च करना नहीं है, बल्कि अपने मुनाफे को वापस मार्केटिंग में डालकर अपनी पहुंच को दस गुना बढाना है। आपको बिजनेस के 'अंदर' काम करना बंद करना होगा और एक दूरदर्शी लीडर की तरह बिजनेस के 'ऊपर' काम करना होगा। यही वह रास्ता है जो आपको एक थकी हुई नौकरी से मुक्त करके एक सफल बिजनेस साम्राज्य का मालिक बनाता है।